खेल जगत

भारत का राष्ट्रीय खेल कौन-सा है? जवाब आपको चौंका सकता है!

तो शायद आपका जवाब होगा— हॉकी!

लेकिन… यही जवाब गलत है।

दरअसल, भारत का कोई आधिकारिक राष्ट्रीय खेल नहीं है।

हैरानी की बात यह है कि जिस हॉकी को हम दशकों से भारत का राष्ट्रीय खेल मानते आए हैं, उसे सरकार ने कभी आधिकारिक तौर पर ‘राष्ट्रीय खेल’ का दर्जा नहीं दिया।

फिर हॉकी को राष्ट्रीय खेल क्यों माना जाता है?

इसका सबसे बड़ा कारण है भारत का शानदार हॉकी इतिहास।

भारतीय हॉकी टीम ने ओलंपिक में 8 स्वर्ण, 1 रजत और 3 कांस्य पदक जीते हैं। खासतौर पर 1928 से 1956 के बीच भारतीय हॉकी का ऐसा दबदबा रहा कि टीम ने लगातार 6 ओलंपिक स्वर्ण पदक अपने नाम किए।

यही वह दौर था जिसने हॉकी को भारत की खेल पहचान का पर्याय बना दिया।

और इस गौरवशाली सफर को महान खिलाड़ियों ने और खास बनाया।

मेजर ध्यानचंद, जिन्हें ‘हॉकी का जादूगर’ कहा जाता है, बलबीर सिंह सीनियर और धनराज पिल्लै जैसे दिग्गजों ने दुनिया के सामने भारतीय हॉकी की अलग पहचान बनाई।

लेकिन एक सवाल अब भी बाकी है…

जब बाघ राष्ट्रीय पशु, मोर राष्ट्रीय पक्षी और कमल राष्ट्रीय फूल हो सकते हैं, तो फिर हॉकी को राष्ट्रीय खेल क्यों नहीं कहा गया?

इसका सीधा जवाब है—
भारत सरकार ने किसी भी खेल को आधिकारिक रूप से राष्ट्रीय खेल घोषित नहीं किया है।

इसलिए अगली बार कोई पूछे—

“भारत का राष्ट्रीय खेल क्या है?”

तो हॉकी कहने से पहले एक बार जरूर सोचिएसही जवाब है:

भारत का कोई आधिकारिक राष्ट्रीय खेल नहीं है।

हॉकी भारत की गौरवशाली खेल विरासत जरूर है, लेकिन आधिकारिक राष्ट्रीय खेल नहीं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button