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आज है विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस

FOURTH PILLARS NEWS 03.05.2026

पूरी दुनिया में पत्रकारिता से जुड़े लोग आज विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं और इस बरस इसकी थीम है : शांतिपूर्ण भविष्य का निर्माण । हम सत्य, स्वतंत्रता और डिजिटल युग में जवाबदेही के साथ स्थायी शांति के लिए खड़े हैं.. बिना किसी भय या पक्षपात के पत्रकारिता “। अगर प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में भारत के स्थान की बात करें तो “रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स” द्वारा 30 अप्रैल, 2026 को जारी किए गए 2026 विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में भारत को 180 देशों में से 157वां स्थान दिया गया है।

एक ब्रिटिश नागरिक जेम्स ऑगस्टस हिक्की , जिन्हें “भारतीय प्रेस का जनक” भी कहा जाता है

विश्व प्रेस स्वतंत्रता हर साल 3 मई को मनाया जाता है, जो स्वतंत्र पत्रकारिता के महत्व, प्रेस की स्वतंत्रता के उल्लंघन के प्रति जागरूकता और पत्रकारों की सुरक्षा को रेखांकित करता है।

विदित हो उदंत मार्तंड भारत का पहला हिंदी समाचार पत्र था, जिसका प्रकाशन 30 मई 1826 को कोलकाता से शुरू हुआ था। कानपुर के निवासी पंडित जुगल किशोर शुक्ल ने इसे प्रकाशित किया था , जो पेशे से वकील थे। यह एक साप्ताहिक पत्र था, जो हर मंगलवार को प्रकाशित होता था यह पत्र प्रत्येक मंगलवार को निकलता था और इसकी भाषा में खड़ी बोली और ब्रजभाषा के मिश्रित रूप का उपयोग किया जाता था आर्थिक तंगी और डाक की अधिक दरों के कारण, यह लगभग 18 महीने बाद 4 दिसंबर 1827 को बंद हो गया… इसकी याद में हर साल 30 मई को ‘हिंदी पत्रकारिता दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।

विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर, मीडिया की स्वतंत्रता के सिद्धांतों को याद किया जाता है और एक स्वतंत्र, बहुलवादी और स्वतंत्र मीडिया के विकास को बढ़ावा दिया जाता है, जो लोकतंत्र के लिए अपरिहार्य है।

उद्देश्य: मीडिया की स्वतंत्रता को बढ़ावा देना, पत्रकारों को सुरक्षा प्रदान करना और प्रेस पर सेंसरशिप या हमलों के खिलाफ आवाज उठाना।

एक ब्रिटिश नागरिक जेम्स ऑगस्टस हिक्की , जिन्हें “भारतीय प्रेस का जनक” भी कहा जाता है उन्होंने ब्रितानी सरकार के अधिकारियों का नाम लिए बिना भ्रष्टाचार और अन्य घोटालों पर स्वतंत्र रूप से लेख लिखे । मुकदमों से बचने के लिए , उन्होंने अपने लेखों में अधिकारियों का उल्लेख करते समय कई उपनामों का इस्तेमाल किया। 1807 में, सरकार विरोधी लेख प्रकाशित करने के लिए हिक्की के बंगाल गजट को अधिकारियों द्वारा जब्त कर लिया गया था।

“भारतीय प्रेस का जनक” यह दिन यूनेस्को की सिफारिश पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित किया गया

मीडिया की स्वतंत्रता का जश्न मनाने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करने का वैश्विक संकल्प है।विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के मुख्य पहलू: इतिहास: इसकी शुरुआत 1993 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा की गई थी। यह 1991 के ‘विंडहोक घोषणापत्र’ की वर्षगांठ का प्रतीक है यह दिन याद दिलाता है कि सरकारों को प्रेस की स्वतंत्रता का सम्मान करना चाहिए और पत्रकारों को बिना किसी डर के सच बोलने की आजादी होनी चाहिए।

उद्देश्य: मीडिया की स्वतंत्रता को बढ़ावा देना, पत्रकारों को सुरक्षा प्रदान करना और प्रेस पर सेंसरशिप या हमलों के खिलाफ आवाज उठाना।

चिंताएं: वर्तमान में, प्रेस स्वतंत्रता खतरे में है, जिसमें पत्रकारों के खिलाफ शारीरिक हमले, सेंसरशिप और आर्थिक दबाव प्रमुख चुनौतियां हैं।महत्वपूर्ण जानकारी:यह दिन प्रेस की स्वतंत्रता के सिद्धांतों का मूल्यांकन करने, पत्रकारों को सम्मानित करने और उन पत्रकारों को श्रद्धांजलि देने के लिए है जिन्होंने अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए जान गंवाई है।भारत के संदर्भ में, यह दिन स्वतंत्र मीडिया की भूमिका पर चर्चा करने और पत्रकारिता की निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।

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