बदल रहा छत्तीसगढ़… अब बेटियां संभाल रही हैं जिलों की कमान

रायपुर। कभी किसी जिले का कलेक्टर बनने का सपना लाखों बेटियों की आंखों में बसता था। आज वही सपना छत्तीसगढ़ की धरती पर हकीकत बनकर उभर रहा है। प्रदेश के 33 जिलों में से 12 जिलों की कमान महिला IAS अधिकारियों के हाथों में है, जो कुल जिलों का लगभग 36 प्रतिशत है।
यह सिर्फ प्रशासनिक नियुक्ति नहीं, बल्कि बदलते समाज की एक मजबूत तस्वीर है। यह उन बेटियों के लिए संदेश है जो छोटे शहरों, गांवों और आदिवासी अंचलों से निकलकर बड़े सपने देखती हैं कि मेहनत और प्रतिभा के दम पर नेतृत्व की सबसे बड़ी जिम्मेदारी भी हासिल की जा सकती है।
बस्तर से सरगुजा तक गूंज रही नारी नेतृत्व की पहचान
प्रदेश के अलग-अलग संभागों में महिला कलेक्टर विकास और प्रशासन की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
बस्तर संभाग में कोंडागांव की कलेक्टर नूपुर राशि पन्ना और नारायणपुर की कलेक्टर नम्रता जैन आदिवासी अंचल के विकास की जिम्मेदारी निभा रही हैं।
दुर्ग संभाग में सबसे अधिक महिला नेतृत्व दिखाई देता है। बेमेतरा में प्रतिष्ठा ममगई, बालोद में दिव्या मिश्रा, कबीरधाम में तुलिका प्रजापति और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में तनुजा सलाम प्रशासन की कमान संभाल रही हैं।
बिलासपुर संभाग में सक्ती की कलेक्टर जयश्री जैन और सारंगढ़-बिलाईगढ़ की कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू जिले के विकास कार्यों का नेतृत्व कर रही हैं।
वहीं सरगुजा संभाग में सूरजपुर की रेना जमील, बलरामपुर-रामानुजगंज की चंदन संजय त्रिपाठी, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर की संतन देवी जांगड़े और कोरिया की रोक्तिमा यादव महिला नेतृत्व की मजबूत मिसाल बन रही हैं।
12 नाम… लेकिन प्रेरणा लाखों की
इन 12 अधिकारियों के नाम केवल एक सूची नहीं हैं। इनके पीछे वर्षों की मेहनत, कठिन प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी, अनुशासन और सेवा का संकल्प जुड़ा है। आज जब कोई स्कूली छात्रा अखबार या सोशल मीडिया पर इन महिला कलेक्टरों के बारे में पढ़ती है, तो उसके मन में एक नया विश्वास जन्म लेता है—“मैं भी बन सकती हूं।”
किसी गांव की बेटी हो या शहर की छात्रा, आदिवासी अंचल की युवती हो या सामान्य परिवार की बच्ची—इन महिला IAS अधिकारियों की मौजूदगी यह साबित करती है कि नेतृत्व अब केवल एक सपना नहीं, बल्कि उपलब्ध अवसरों का परिणाम है।
बदलाव का सबसे सुंदर चेहरा
छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण की चर्चा अक्सर योजनाओं और आंकड़ों के जरिए होती है, लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग है। 12 जिलों में महिला कलेक्टरों की पदस्थापना स्वयं उस बदलाव का जीवंत उदाहरण है, जहां निर्णय लेने की मेज पर महिलाओं की भागीदारी लगातार मजबूत हो रही है।
कलेक्टर किसी जिले में शासन की सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियों में से एक होती हैं। विकास योजनाओं से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल कल्याण, कानून-व्यवस्था और जनहित के अनेक निर्णयों में उनकी भूमिका सीधे लोगों के जीवन को प्रभावित करती है।
यही कारण है कि आज छत्तीसगढ़ की यह तस्वीर केवल महिला अधिकारियों की उपलब्धि नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के आत्मविश्वास की भी कहानी है।
कहानी 12 महिला कलेक्टरों की है… लेकिन प्रेरणा छत्तीसगढ़ की लाखों बेटियों की है।



