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रत के चंद्रयान-3 चंद्र मिशन को अमरीकी वैमानिकी और अंतरिक्ष विज्ञान संस्थान ने 2026 का गोडार्ड अंतरिक्ष पुरस्कार

नई दिल्ली: अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत का दबदबा लगातार बढ़ता जा रहा है। ISRO के ऐतिहासिक चंद्रयान-3 मिशन को अमेरिका में प्रतिष्ठित गोडार्ड एस्ट्रोनॉटिक्स अवॉर्ड 2026 से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान अमेरिका के वैमानिकी और अंतरिक्षयानिकी संस्थान (AIAA) ने गुरुवार को वाशिंगटन डीसी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रदान किया।


अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने एआईएए सम्मेलन में यह पुरस्कार प्राप्त किया। इसरो को यह पुरस्कार चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र के निकट चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक लैंडिंग के लिए दिया गया है, जिससे चंद्रमा की हमारी समझ बेहतर करने में मदद मिली है।
राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्पेस विजन 2047 का जिक्र करते हुए भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान, डीप स्पेस एक्सप्लोरेशन और तेजी से बढ़ते कमर्शियल स्पेस सेक्टर की योजनाओं के बारे में बताया। उन्होंने भारत और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष क्षेत्र में सरकारों, उद्योगों और रिसर्च संस्थानों के सहयोग को और मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया।


क्वात्रा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि एआईएए द्वारा प्रदत्त प्रतिष्ठित 2026 गोडार्ड एस्ट्रोनॉटिक्स पुरस्कार के लिए इसरो और चंद्रयान 3 टीम को बधाई।
23 अगस्त 2023 को चंद्रयान-3 ने इतिहास रचते हुए चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सफल सॉफ्ट लैंडिंग की थी। यह दुनिया का पहला मिशन था जिसने चंद्रमा के इस बेहद अहम और अब तक सतह स्तर पर अनछुए क्षेत्र में सफलतापूर्वक कदम रखा।


मिशन ने चंद्रमा की सतह और दक्षिणी ध्रुवीय मिट्टी से जुड़े महत्वपूर्ण वैज्ञानिक आंकड़े जुटाए। इन आंकड़ों से वहां मौजूद अहम रासायनिक तत्वों और संभावित संसाधनों की पुष्टि हुई, जो भविष्य में चंद्रमा पर मानव मिशनों और निर्माण गतिविधियों के लिए उपयोगी हो सकते हैं।
गोडार्ड एस्ट्रोनॉटिक्स अवॉर्ड को अंतरिक्ष विज्ञान और एस्ट्रोनॉटिक्स के क्षेत्र में AIAA का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है। यह पुरस्कार महान रॉकेट वैज्ञानिक रॉबर्ट एच गोडार्ड के सम्मान में दिया जाता है, जिन्हें आधुनिक रॉकेट तकनीक का अग्रदूत माना जाता है।

सोर्स : नवभारतटाइम्स.कॉम


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