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प्लास्टिक कचरे से बनाया 32 रुपये लीटर वाला पेट्रोल

वडोदरा के गति शक्ति विश्वविद्यालय (GSV) के वैज्ञानिकों ने प्लास्टिक कचरे से पेट्रोल-डीजल बनाने की तकनीक खोजी है। इस ‘प्लास्टो-पेट्रोल’ का सफल ट्रायल हो चुका है। देश की बड़ी कंपनियों की तीन मोटरसाइकिलों को इस ईंधन से चलाया गया। एक लोकप्रिय 100cc बाइक ने 1 लीटर ईंधन में 60 किमी का शानदार माइलेज दिया (जो आम पेट्रोल पर 62 किमी देती है)। इसने प्रदूषण जांच (PUC) भी आसानी से पास कर ली

डॉ. वेंकट चिंताला के नेतृत्व में इस प्रोजेक्ट की शुरुआत करीब एक दशक पहले DST (डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी) के फंड से हुई थी। 2020 में डॉ. चिंताला ने GSV में ‘प्लास्टो फ्यूल्स रिसर्च सेंटर’ बनाकर वडोदरा रेलवे यार्ड के पास 1.8 टन रोजाना क्षमता का पायलट प्लांट शुरू किया। इसकी खासियत यह है कि यह गंदे और मिक्स प्लास्टिक कचरे को भी रीसायकल कर लेता है। यहां 100 किलो प्लास्टिक से लगभग 50 किलो ईंधन बनता है। कच्चा तेल 24 रुपये प्रति लीटर और रिफाइन होकर यह पेट्रोल 32 रुपये प्रति लीटर पड़ता है।

सस्ते पेट्रोल की नई उम्मीद
100 किलो प्लास्टिक से बन सकता है 50KG ईंधन
₹ 24 /लीटर कच्चे ईंधन तेल की लागत
₹ 32 /लीटर रिफाइंड पेट्रोल/डीजल-ग्रेड ईंधन की लागत
कच्चा माल डंपयार्ड, लैंडफिल और रेलवे से इकट्ठा किया जाता है
भारत की प्रमुख वाहन कंपनियों की तीन बाइकों पर किया गया टेस्ट
अब इसे लेह-लद्दाख, केदारनाथ और बद्रीनाथ जैसे दुर्गम इलाकों में लगाने की तैयारी है। साथ ही झांसी रेलवे लोकोमोटिव शेड और कोलकाता सैन्य प्रतिष्ठान में प्लांट लगाने की बातचीत अंतिम दौर में है। विश्वविद्यालय के वाइस-चांसलर प्रोफेसर मनोज चौधरी (Manoj Choudhary) इस प्रोजेक्ट को पूरे देश में फैलाने के लिए रेलवे और रक्षा मंत्रालय के संपर्क में हैं।
इस तकनीक की ताकत देखकर विमानन क्षेत्र की बड़ी कंपनी एयरबस (Airbus) भी GSV के साथ मिलकर कचरे से हवाई जहाज का ईंधन बनाने पर काम कर रही है।

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